Monday, January 25, 2010
मंहगाई का आलम
चीनी का स्बाद पहले ही कड़वा हो चुका है और अब लगता है कि कृषि और खाद्यमंत्री शरद पवार दूध का रंग भी हलका करने का मन बना लिया है। केन्द्रीयमंत्री के हालिया ब्यान से ऐसा ही लगता है कि वे गरीब के मुहं से दाल औरचीनी तो पहले छीन चुके हैं अब इस कड़कड़ाती सर्दी को भी बिना चाय केगुजारने का इंतजाम करने में लगे हैं। केन्द्रीय मंत्री जी का कहना है कि उत्तर प्रदेश के दूध उत्पादकों काबुरा हाल है। राज्य सरकार उन्हें प्रोत्साहन नहीं दे रही हैं इसलिएउन्हें दूध के दाम बढ़ा देने चाहिए। जबकि आंकड़े कहते हैं कि दूध काउत्पादन साल दर साल बढ़ रहा है। पंजाब में पिछले वर्ष की अपेक्षा 3 % दूधका उत्पादन बढ़ा है। आगरा में पिछले वर्ष के बराबर ही इस वर्ष उत्पादनरहा। बावजूद इसके पवार जी का कहना है कि दूध उत्पादन घटा है। पवार जी कोज्ञात होना चाहिए कि दूध के दाम तो दूध उत्पादक बिना उनके सुझाव के हीबढ़ा देते हैं। हर साल दूध के दामों में वृद्धि देखी जा सकती है। इस सालदूध 25 से 30 रूपए लीटर बिक रहा है जो कि पिछले वर्ष 20 से 25 रूपए लीटरथा और उससे भी पिछले वर्ष 2007 में यह आंकड़ा 20 रूपए लीटर ही था। अतःजब हर साल दूध के दामों में लगभग 5 रूपए लीटर की बढ़ोतरी हो जाती है तोफिर क्यों खाद्य मंत्री जी और मूल्य बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। मंहगाईका पहले ही यह आलम हो चुका है कि वह आम आदमी तो क्या खास आदमी की भी कमरतोड़ चुकी है। दाल 100 रूपए किलो बिक रही है, चीनी 50 रूपए किलो हो चुकीहै। अब अगर दूध भी महंगा हो गया तो अब आम जनता तो सिर्फ काली और फीकी चायपीकर ही गुजारा करेगी। रहम किजिए खाद्य मंत्री जी, आपको शायद याद नहीं किदेश की 80% जनसंख्या सिर्फ 20 रूपए रोज पर ही गुजारा कर रही है।
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nice
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